Download Lagu Faqeera - Akhil Redhu MP3
Sedang memuat audio terbaik untukmu...
0:00
0:00
Lirik lagu Faqeera - Akhil Redhu
जब आँखों का अश्क कभी पैगाम बनेगा
तब ग़ुरबत से उठने की तू बात करेगा
कल तक जो काफ़िर था वो भी साथ चलेगा
बरकत का ये बदल फिर बरसात बनेगा
हर काम मे अगर आराम मिले
तो कों मिसाल बनाए
जब तक ना मिल ठोकर तो बता
फिर चलना कौन सिखाए
आँखों मे दिखे है आस
मैली सी हुई पोशाक
अब तक ना दिखी मंज़िल तो बता
फिर कौन ही रहा दिखाए
सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ
मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा
छोड़ा वो शहेर जहा घर था मेरा
मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा
सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ
मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा
छोढ़ा वो शहेर जहा घर था मेरा
मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा
देख के अपना अक्स तू खुदसे रोज़ लड़ेगा
पैसे कमाने की फिर सबसे होडड़ करेगा
सारी जवानी जिस्मो मे मदहोश रहेगा
फिर बाकी उम्र तन्हाई दख आफ़सूस करेगा
मिलते ही नही वो लोग जो यादें छोढ़ चले है
मुझपे लगा के दोष वो खुद खामोश खड़े है
होश मे आ नादान वो कहते इश्क़ जिस्म है
कहते है इससे अगर होश तो हम बेहोश भले है
सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ
मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा
छोढ़ा वो शहेर जहा घर था मेरा
मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा
सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ
मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा
छोड़ा वो शहेर जहा घर था मेरा
मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा
अब कोई शिकवा नही
हर ज़ख़्म मरहम हुआ
कोई साथ दे या नही
मुझे इश्क़ खुदसे हुआ
याद नही एहसास वो
इश्क़ का ज़रिया राज़ हू
ढूंढ रहा मुझको कहा
खुदमे मुकामल आज हू
सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ
मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा
छोड़ा वो शहेर जहा घर था मेरा
मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा
सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ
मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा
छोड़ा वो शहेर जहा घर था मेरा
मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा