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Cover Lagu Faqeera - Akhil Redhu

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Akhil Redhu

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Lirik lagu Faqeera - Akhil Redhu

जब आँखों का अश्क कभी पैगाम बनेगा तब ग़ुरबत से उठने की तू बात करेगा कल तक जो काफ़िर था वो भी साथ चलेगा बरकत का ये बदल फिर बरसात बनेगा हर काम मे अगर आराम मिले तो कों मिसाल बनाए जब तक ना मिल ठोकर तो बता फिर चलना कौन सिखाए आँखों मे दिखे है आस मैली सी हुई पोशाक अब तक ना दिखी मंज़िल तो बता फिर कौन ही रहा दिखाए सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा छोड़ा वो शहेर जहा घर था मेरा मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा छोढ़ा वो शहेर जहा घर था मेरा मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा देख के अपना अक्स तू खुदसे रोज़ लड़ेगा पैसे कमाने की फिर सबसे होडड़ करेगा सारी जवानी जिस्मो मे मदहोश रहेगा फिर बाकी उम्र तन्हाई दख आफ़सूस करेगा मिलते ही नही वो लोग जो यादें छोढ़ चले है मुझपे लगा के दोष वो खुद खामोश खड़े है होश मे आ नादान वो कहते इश्क़ जिस्म है कहते है इससे अगर होश तो हम बेहोश भले है सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा छोढ़ा वो शहेर जहा घर था मेरा मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा छोड़ा वो शहेर जहा घर था मेरा मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा अब कोई शिकवा नही हर ज़ख़्म मरहम हुआ कोई साथ दे या नही मुझे इश्क़ खुदसे हुआ याद नही एहसास वो इश्क़ का ज़रिया राज़ हू ढूंढ रहा मुझको कहा खुदमे मुकामल आज हू सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा छोड़ा वो शहेर जहा घर था मेरा मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा सारा जाग देखे मुझे हस्ता हुआ मेरा मॅन जाने मेने कितना सहा छोड़ा वो शहेर जहा घर था मेरा मैं हू वो फ़क़ीरा जो है गिर के उठा